रविवार, 11 जनवरी 2026

11 जनवरी 2026 के अंक में प्रकाशित

गाँव- गाँव दारू बिक रहल बा, दूध बटल अपराध 

मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें-हाल त बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। माघ मकरगति भईल बा। राजनीति चकरगति भईल बा। गाँव- गाँव दारू के ठेका खुल गईल। बेचेवाला मालमाल आ पिये वाला कंगाल हो गईले। बिहार में दारू बंद भईल त यूपी वालन के रोजगार खुल गइल। जवना की लगे टूटही साईकिल ना रहे आज फरचूनर से घुमत बा। ओकरा कोठी कटरा करेंसी के बहार हो गईल, जबसे ओकरा शराब के कारोबार हो गईल। ओकर एक टांग यूपी में त दूसरका बिहार हो गईल। अब येह ठंडी में भी एक खेप बिहार पार कराके आराम से रजाई तान के सुतल बा। चारों तरफ ओकर बाजा बाजि गईल, उ राजा  हो गईल। साँच कहल बा - रजाई वाला राजा, कंबल वाला सोये। दोहरी वाला किकुरी मारे, चदरा वाला रोये। सरकार के कानून व्यवस्था में रोजे सेन्हि लगाके दनादन दारू हेलववला के कारोबार बिहार से सटल जिलन में खूब फलत-फूलत बा। नवहा बेरोजगारन के रोजगार मिल गईल बा। आबकारी विभाग के इनकम बढ़त बा, एही से कठोर कार्रवाई की जगह लचिला रुख अख्तियार कईल जाता। सीमा के थानेदारन के कमाई भी बढ़ल बा। कार्रवाई की नाम पर कबो कबो ज़ब सेटिंग नइखे हो पावत त चाप दिहल जाता। जब सेटिंग हो जाता तब आवs जा घर अपने हs। सरकार के जांच एजेंसी विरोधी दल की नेतन के घर खोनला में लागल बा। बेरोजगार लोग के आय के जांच करा दीं आँख के पट्टी खुल जाई। ज़ब कवनो काम धंधा नोकरी चकरी हइये नईखे त कहां से चरपहिया चलत बा। एकर जाँच ना होई। काहें की एकर जाँच होई त नेतन की आगे पीछे जिन्दावाद जिन्दावाद के करी? नेतन के राजनीति की चश्मा से ओहिजा बवाल दिखी जहां चुनाव होखे वाला होई । अब पश्चिम बंगाल में चुनाव बा त बंगलादेश के अत्याचार से अख़बार भरल मिलत बा । अब अख़बारवालन का भी चीन, पाकिस्तान श्रीलंका ना लउकी। अब टीवी की स्क्रीन पर छउक -छउक के बंगला देश देखावल जाई। 
राजनीति के भी आपन नजरिया होला। कहां ताके के बा, कहां झाँके के बा, आ कहां आँख बंद क लेबे के बा  ओकर अलग अलग चश्मा बा। प्रयागराज में माघ मेला लागल बा। कल्पवास करे वाला लोग त पुन्य कमाते बा एक जने दूधिया भाई सोचलेन मुफ्त के दूध दान क के कुछ पुन्य हमहूँ बिटोर लीं। बाकी त सालो साल गंगा माई की कृपा से दूध के धंधा चलते रही। माघ मेला में मुफ्त के दूध बांटे गईलेन त पुलिस पीछे पड़ गईल। पकड़ के झूसी थाने ले गईल। मुफ्त के दूध बांटे वाला भूसी ना दिहलेँ, काहे की कवनो चोर डाकू त रहलें ना उ नेता रहलें नेता। सांझ ले छूट गईलन। सवाल इ बा कि ओही मेला में किलो के किलो गांजा फूंकाता उ नाहीं मेला पुलिस के देखाता। 
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रविवार, 4 जनवरी 2026

4 जनवरी 2026 की स्वाभिमान जागरण के अंक में प्रकाशित

ई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...

मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। धुंध छवले बा, कुहेसा पड़त बा। शीतलहर चलता। लइकाई में गावत रहलीं जा - "दई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...तोहरी बलकवा के जड़वत बा। पुअरा फूंकी फूंकी तापत बा।"आजकल पुअरा त खेतवे में धान कटते फूंका जाता। पूस-माघ के महीना में लवना, लेहना, तेवना तीनों के अकाल चलत रहे। अब समय बदल गईल। कबो जमाना रहल, हम्मन के पुरखा पुरनिया गुलाम रहल। आजादी की लड़ाई में अपनी नगर के बहुत योगदान रहल। खजड़ी वाला भागवत भगत ज़ब गावत रहलें -गेहूआ के रोटिया रहरिया के दलिया तनी घियुवा मिलिहे ना, जब अइहे अजदिया तानि घियुवो मिलिहे ना। देश आजाद भईल त लोग एतना आजाद भईल की सड़क आ रेल लाइन की किनारे कवनो सरकारी जमीन पर मंदिर, मस्जिद, मजार बना के आपन आपन   समराज्य फैलावल शुरू कईलेन। अपना नगर में भी अइसही एगो जमीन पर मरला की बाद एक जने दफना दिहल गईले। उ भले जमीन में दफ़न रहलें उनकर साम्राज्य बढ़त गईल। सत्तर बरिस में क़ब्र पर आस्था के मेला आ मनौती की बहार में कब्र मजार बन गईल। मजार पर मन्नत की मंगन में हिन्दू मुसलमान सब बटोरात रहलेन। मजार की जमीन के विवाद में नगीना पहलवान मरा गईलन। समय बदलल। सियासी माहौल बदलल। अब गाड़ल मुर्दा उखाड़ शुरू भईल। जड़ खोजाईल त जमीन सरकारी निकलल। मजार पर लागे वाला मेला पर प्रतिबंध लाग गईल। येह साल कवनो दउरी दोकान प्रशासन ना लागे दिहलसि। जवना जगह पर मेला के रेला लागत रहे ओहिजा खाली पुलिस के झमेला देखल गईल। कागज़ पत्तर में मजार से बंजर दर्ज हो गईल। 
नेताजी जंग छेड़ देले बाड़न। जमीन बंजर बा त मजार पर बुलडोजर चलावे के मांग करत बाड़न। भीषण ठण्ड में माहौल गरम बा। ना जने कहिया दइब उगिहे। उजियार होई। लेकिन अबे मौसम में ही ना प्रशासनिक अमला में भी धुंध छवले बा। ठंड घेरले बा। लोग किकुरल बा। अब पता न इ दईब के एजेंडा ह की राजनीति के प्रोपोगंडा ह, लेकिन कुछ त ह। 
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रविवार, 14 दिसंबर 2025

14 दिसंबर 2025 के अंक में प्रकाशित

समय के फेरा, समय के फेरी 
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें समय के गति चलता। समय सवाल खड़ा करता, समय जवाब भी देता। समय की चलते कबो नाव गाड़ी पर कबो नाव पर गाड़ी। एहीसे कहल गईल बा, मनुष्य बली नहीं होत है समय होत बलवान...। आगे भी समय के काल चक्र चली। केकर पाप बली आ केकर पुण्य बली, समय के साथ केहू के सिक्का चली आ केहू दिल जली। समय की काल चक्र में ही 25 साल पुरान भूत उपट गईल। पुलिस विभाग के कबो बड़वर अधिकारी रहलन, उनही से लपट गईल। जवन पुलिसकर्मी सलामी ठोंकत रहलें समय अइसन पलट गईल की अब उहे झपट गईल। इ पुलिस ह, जेकर सत्ता ओकर चेरी, जेके कहाई ओही के हेरी। पुलिस वइसे पकड़लसि जेईसे पाकिस्तान की बाडर से कवनो आतंकवादी पकड़ के आईल बा। पचास-बावन किलो के एगो आरोपी के दु सौ पुलिसवाला धकिआवत कोर्ट में ले गईलन। छउक-छउक के सवाल कईला, सबकी ममिला में ऊँगली कईला की चलते सत्ता की आँख के किरकिरी बनला की वजह से, ऐके मामिला जवन सितंबर में लिखाइल आ दिसंबर में आपन रूप देखा दिहलसि। पुरान मामिला उपाट के नया घाव दिहल जाता। अगर सरकार दुआँखा नईखे त जवना लोगन पर दर्जन से ऊपर केस बा उनपर कार्रवाई काहे नईखे होत? देश में दुआँखा व्यवस्था चलत बा। पहिलहु चलत रहे। बहुत पुराना जमाना के बात ह, कुछ लड़िकन की मार से एगो गदहा मर गईल रहे। बाबा से पूछाईल, त बतवलें बहुत बड़वर पाप लाग गईल। पूछे वाला चालाक रहल, कहलसि गदहा मरला में राउर लड़िका संतोष भी रहलें हं। बाबा के निर्णय बदल गईल। बोल पड़लन- दस पांच लड़िका एक संतोष, गदहा मरले कवनो ना दोष। आजुओ उहे हाल बा। देश में दुआँखा कानून ना रहित त दुबई से बइठल आरोपी के जमानत केईसे मिल जाई? दुआँखा कानून ना रहित त बड़े बड़े जघन्य अपराध के आरोपी सत्ता आ विपक्ष में कॉलर टाइट क के कईसे राज काज में हिस्सा लितन। समय सबके हिसाब लेला। समय के गति देखीं, बोलले रहलेन कि हवाई चप्पल पहने वाला हवाई जहाज से चली। अब, जब जहजिये बायना फेर देहलसि त जूता मोजा कोट शूट वाला भी झंखत हवें। फेरू मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते...

रविवार, 23 नवंबर 2025

23 नवंबर 25 के अंक में प्रकाशित भोजपुरी व्यंग्य

लोकतंत्र में नाम आधारा बंजर भईल जवन रहे मजारा  मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें-हाल त बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। हर जगह आधार! आधार!! आधार!!! पैन कार्ड से आधार जोड़ल गईल। राशन कार्ड से आधार जोड़ल गईल। बैंक अकाउंट से आधार, स्कूल की परीक्षा से आधार, गैस सिलेंडर से आधार, मोबाइल नंबर से आधार, गाड़ी घोड़ा खरीदला पर आधार। जमीन जायदाय की खरीद बिक्री पर आधार। हर योजना में आधार। अब वोटर लिस्ट में आधार। आधार ही अब लोकतंत्र के आधार बनी। कवना आधार पर कहल जा कि सब सही हो जाई। एगो सवाल बा-जब सब कुछ आधार से जुड़ल बा त कईसे आयकर दाता लोग भी कोटा से मुफ्त के राशन लेता? नौकरी, कोठी, कार वाला लोग भी अपनी देश में मुफ्त राशन योजना के लाभ उठावत बा। इ सब देखते भी सरकार मौनी बाबा बनल बा। सब कुछ आधार से जोड़ला की बाद भी अपनी प्रदेश में लगभग दस लाख घुसपैठिया बाड़न। इ घुसपैठिया सरकारी राशन उठावत बाड़न, वोट भी देत बाड़न। जायज नाजायज काम कर के सामाजिक संरचना पर भी समय समय पर वार करत हवें। यूपी में सात साल से सरकार घुसपैठियन के हटावत बा, लेकिन घुसपैठिया हटते ना बाड़न। कारण इ बा कि उनके केहू न केहू स्थानीय नेता लोग संरक्षण देले बाड़न। हमरी येह बात के पक्का आधार इ बा कि सरकार के ही जाँच में लखनऊ राजधानी में ही एक लाख बंगला देशीन के रहला के प्रमाण मिलल। फिर पता न कवन गुल खिलल की मामिला ठंडा बस्ता में धरा गईल। अब सरकार फिर जागलि बा। अब हर जिला में अस्थायी डिटेन्शन सेंटर बनी। घुसपैठिया धरल जईहें। वोही सेंटर में रखल जइहन। ओकरा बाद जे जवना देश से आईल बाड़न ओही देश की सीमा पर छोड़ल जइहन। सरकार से एगो सवाल बा- जवन फर्जी आधार बनवा लेले हवें, ओही आधार की नाम पर जमीन लिखवा लेले बाड़न। मकान बनवा लेले बाड़न। बिजली कनेक्शन लगवा लेले बाड़न। छोट मोट मारपीट क के ओही पता पर थाना में केस दर्ज बा। ओही पता पर कोर्ट कचहरी में मुकदमा चलत बा। उनहन के भी ओईसे घेरला के जरूरत बा जईसे देवरिया ओवर ब्रिज की नीचे बनल मजार के जमीन अब अपनी मूल स्वरूप बंजर में दर्ज हो गईल। फेरू मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते...
हम अपनी ब्लॉग पर राउर स्वागत करतानी | अगर रउरो की मन में अइसन कुछ बा जवन दुनिया के सामने लावल चाहतानी तअ आपन लेख और फोटो हमें nddehati@gmail.com पर मेल करी| धन्वाद! एन. डी. देहाती

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